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रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस

रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा   :  मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस
रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एस.एम.एस. -- -- -- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ट्रेन में आने वाली दिक्कतों संबंधी यात्रियों की शिकायत के लिए रेलवे ने एसएमएस शिकायत सुविधा शुरू की थी। इसके जरिए कोई भी यात्री इस मोबाइल नंबर 9717630982 पर एसएमएस भेजकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। नंबर के साथ लगे सर्वर से शिकायत कंट्रोल के जरिए संबंधित डिवीजन के अधिकारी के पास पहुंच जाती है। जिस कारण चंद ही मिनटों पर शिकायत पर कार्रवाई भी शुरू हो जाती है।

जून 27, 2010

अल्ला मेघ दे , पानी दे . . .


रायपुर सम्भाग में अब तक बारिश नहीं हो पाई है . शहरी इलाके अब भी गरमी और उमस से परेशान हैं . तो वहीं दूसरी ओर संभाग के ग्रामीण  इलाकों  में  किसान  खेती का  कामकाज  शुरू करने के लिए बारिश  की  बाट  जोह रहे हैं .  मौसम विभाग के बताए अनुसार इस वर्ष बारिश १५ जून के आसपास आ जानी चाहिए थी , लेकिन बारह-तेरह दिनों के बीत जाने के बाद भी बारिश का रायपुर संभाग में तो कहीं भी नामो निशान  नहीं दिखाई पड रहा है .क्या शहर और क्या गाँव  दोनों ही जगह रहने वाले लोग अब परेशान दिखने लगे हैं .   खबर है की रायपुर शहर में ही अलग -अलग दिनों में अलग -अलग मोहल्लों में हल्की फुल्की बारिश हुई है ,जिसकी वजह से राहत नहीं बल्कि  लोगों की परेशानी ऊमस की वजह से और बढ़ी है . संभाग के गाँवों  में खेती का काम शुरू नहीं हो पाया है . आसपास में बस्तर , बिलासपुर  संभाग में थोडा बहुत पानी बरसने की खबर जरूर है . समूचा  प्रदेश  मानसून  की  अच्छी  बारिश  का  इंतजार  कर  रहा  है  .  इस वर्ष अच्छी खासी गरमी पड़ने की वजह से भी लोगों को उम्मीद थी की जल्दी ही अच्छी बरसात आ जायेगी  . लेकिन ऐसा कुछ  भी नहीं हुआ .  एक बड़ी विडम्बना यह है जून माह में गंगरेल बाँध का जल  स्तर बढने की बजाय  घट गया  है  . " पानी "  मानों लोगों की उम्मीदों  पर  फिर  गया  है . पिछले आठ -दस  वर्षों  में अकेले  रायपुर  शहर  में  ही  विकास  करने -कराने   के नाम  पर  हजारों  बड़े-बड़े    पेड़  काटे  गए  हैं  .  प्रदेश  के जंगलों  में  चल  रही   अवैध   लकड़ी   कटाई   की   कहानी  ही अलग  है .  छत्तीसगढ़  में सही मायने प्रजा का नहीं बल्कि अधिकारियों का जंगल राज चल रहा है  . पौलीथीन  उद्योग  देखते  ही देखते यहाँ   का   बड़ा   उद्योग   बन   बैठा  है  .  हर  आदमी  को  हर  छोटे  से  छोटे    सामान    को  लाने  ले  जाने  के  लिए  पौलिथिन  बैग  चाहिए  ही  चाहिए  .  जब  शासन  प्रशासन  की प्राथमिकतायें  ही कुछ और हों  और  लोग  अपने भविष्य  के साथ खिलवाड़  करने से ना डरते हों  तो  ऐसी  जगह  मानसूनी   या किसी भी अन्य सिस्टम  से बारिश  हो भी तो कैसे  हो  ?  अपनी इन गलतियों  से परे  अब लोग कर भी क्या सकते हैं भला  ?  सिवाय इसके की आसमान की ओर अपने दोनों हाँथ और निगाहें उठा कर कहें - "  अल्ला मेघ दे , पानी दे , छाया दे , रे    रामा  मेघ  दे . .  . |   हम  सुधर जाएं ऐसा कोई  सिस्टम  बनते  तो दिखता नहीं  , ऊपर वाला ही शायद अपना  सिस्टम  हमारे  लिए  सुधार ले  और  हमेशा  की तरह  हमारा  भला  कर  दे  .
 आइये  जहां  इतना  इन्तजार  किया   ,  वहां  थोडा  इन्तजार  और  सही  |  आशा  से  ही  तो  ये   आकाश  भी टिका  है  |  हम  आप  भी  टिक  कर  देखते  हैं   थोड़े  दिन |  

1 टिप्पणी:

  1. Mishra Ji,
    Kuch samay pahle Bastar ki kaman ek sar-phire adhikari ko HAMARI BHAJPA sarkar ne soapi thi. Us adhikari ne Jagdalpur Kotwali se airport tak 100 yrs se jyada purane sabhi ped katwa diye.
    Jungle pahle hi SAAF ho chuke hai.
    Ped katne ki ye bimari ab mahamari ka rup le chuki hai. NAYE LAGANE NAHI AUR PURANE RAHNE DENA NAHI- is formula pe ye sarkar chal rahi hai.
    Kewal Baarish hi nahi pura Paryavaran buri tarah prabhavit ho gaya hai.
    Raipur ke aas-pass aaudhyogik pradushan par bhi Govt. ki haalat GANDHI JI ke 3 Bandaron jaisi hai.

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आपकी मूल्यवान टिप्पणी के लिए कोटिशः धन्यवाद ।

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