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रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस

रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा   :  मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस
रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एस.एम.एस. -- -- -- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ट्रेन में आने वाली दिक्कतों संबंधी यात्रियों की शिकायत के लिए रेलवे ने एसएमएस शिकायत सुविधा शुरू की थी। इसके जरिए कोई भी यात्री इस मोबाइल नंबर 9717630982 पर एसएमएस भेजकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। नंबर के साथ लगे सर्वर से शिकायत कंट्रोल के जरिए संबंधित डिवीजन के अधिकारी के पास पहुंच जाती है। जिस कारण चंद ही मिनटों पर शिकायत पर कार्रवाई भी शुरू हो जाती है।

जून 30, 2010

नक्सली आतंक और अधिकारियों के काहिलपन से शर्मसार है छत्तीसगढ़ , 27 जवान और हुए शहीद

रायपुर .30 जून . छत्तीसगढ़ के राज्यपाल  शेखर दत्त, मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह और गृह मंत्री  ननकी राम कंवर ने रायपुर  माना कैम्प में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के उन शहीद जवानों को विनम्र श्रध्दांजलि अर्पित की, जो नारायणपुर जिले में धौड़ाई के पास कल नक्सलियों का मुकाबला करते हुए शहीद हो गए थे। श्रध्दांजलि कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के अनेक मंत्री, विधायक तथा राज्य शासन और पुलिस और केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में धौड़ाई के पास नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले में मंगलवार २९ जून को   "सी आर पी एफ़ " एवम जिला पुलिस   के 26  जवान शहीद हो गए । नक्सलियों ने यह हमला दोपहर 1.30 बजे के आस-पास किया । तीन माह में नक्सलियों के द्वारा किया गया यह तीसरा बड़ा हमला है । इस बार घात लगाकर बैठे लगभग 600 नक्सलियों ने सीआरपीएफ के 70 जवानों पर हमला किया ।अप्रैल से जून के बीच यह नक्सलियों का तीसरा बड़ा हमला है। चिंतलनार के पास किए गए हमले में नक्सलियों ने 76 जवानों की हत्या कर उनके सारे हथियार लूट लिए थे। सुकमा के पास नक्सलियों ने एक यात्री बस को बारूदी सुरंग से उड़ा दिया था, जिसमें गश्त से लौट रहे एसपीओ काफी संख्या में बैठे थे। हमले में 31 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें एसपीओ 15 और 16 सिविलियंस थे।छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में नक्सली हमले के बाद से लापता केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवान का शव पुलिस ने बरामद कर लिया है। इस घटना में अब शहीदों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है।
      शर्मनाक एवम बेहद खेदजनक विषय यह है कि करोड़ों रुपये फ़ूंक कर भी हमारा गुप्तचर विभाग क्या करता है किसी के भी समझ नहीं आता है । ऐसा शायद ही कभी हुआ हो हमारी इस सरकारी एजेंसी की खबर से किसी की जान बची हो । नक्सली    समस्या    से निबटते हुए  एक ओर जहां जवान बस्तर के बीहड़ वनों में अपनी जान से हांथ धो रहे हैं वहीं दुसरी ओर आला अफ़सर राजधानी में बेशर्मी के साथ ए सी चला कर चैन की नींद सो रहे हैं । शर्म आनी चाहिए अधिकारियों को । पुलिस कब -कहां से आ जा रही है ,नक्सलियों को इसकी खबर हो जाती है और वो हमला करने में सफ़ल हो जाते हैं , लेकिन  खुफ़िया तंत्र के नाम पर करोड़ो रुपये खर्च करने वाली हमारी पुलिस को यह भी नहीं मालुम हो पाता है सैकड़ों की संख्या में नक्सली कहां आ जा रहे हैं ,कितनी शर्मनाक बात है यह ?
नक्सलियों ने राज्य में एक बार फिर बड़े हमले को अंजाम देकर हम सभी की नींद उड़ा दी है ।  नारायणपुर जिले में दोपहर करीब डेढ़ बजे 500 से भी अधिक  नक्सलियों ने घात लगाकर गश्त पर निकले जवानों पर हमला कर दिया, जिसमें 26 जवान शहीद हो गए। नक्सली हमले में 12 से भी ज्यादा जवान बुरी तरह से घायल बताए जा रहे  हैं । मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। घायलों को जगदलपुर अस्पताल लाया गया है । यह  घटना नारायणपुर से 32 किमी दूर सीआरपीएफ के धौड़ाई कैम्प के पास हुई। सीआरपीएफ के 70 जवानों की टीम आज सुबह कैंप से रोड ओपनिंग के लिए निकली थी। उसके साथ नारायणपुर जिला पुलिस और एसपीओ के जवान भी थे। काम खत्म करने के बाद पूरी टीम दोपहर को पैदल वापस लौट रही थी।
कैंप से करीब साढ़े तीन किमी दूर महिमागावाड़ी के पास नक्सली घात लगाकर बैठे थे। पुलिस को संदेह है कि नक्सलियों को पहले ही भनक लग गई थी कि जवानों की एक टुकडी  सुबह से  रोड ओपनिंग के लिए निकली है जिस  पर नक्सली दूर से नजर रखे हुए थे। रेंज में आते ही एके 47 जैसे हथियारों से लैस नक्सलियों ने उन पर बेहिसाब  फायरिंग शुरू कर दी। बताया गया है कि ज्यादातर  जवानों की मौतें नक्सलियों की तरफ से हुई पहली फायरिंग से ही हुईं। सीआरपीएफ और जिला पुलिस के जवानों ने भी जवाबी हमला  किया। सीआरपीएफ के आईजी आरके दुआ ने बताया कि मुठभेड़ करीब ढाई घंटे तक चली। डीजीपी  छत्तीसगढ़  विश्वरंजन ने  इस मुठभेड़ में 26 जवानों के मारे जाने की पुष्टि कर दी है। घायलों में से चार की हालत चिंताजनक बताई जा रही है। घायलों को सड़क के रास्ते जगदलपुर के महारानी अस्पताल लाया गया।
लचर संचार व्यवस्था होने के कारण  प्रशासन को हादसे की सूचना में देरी हुई। शाम तक सूचना थी कि मुठभेड़ में सीआरपीएफ के चार जवान घायल हुए हैं। रात करीब साढ़े आठ बजे स्थिती साफ हुई कि फायरिंग में काफी संख्या में जवान शहीद हुए हैं। घायलों को लाने के लिए वायुसेना का हेलिकॉप्टर भी भेजा गया था, लेकिन कुछ कारणों से वह घटनास्थल के पास नहीं  उतर  पाया।
मुख्यमंत्री ने बुलाई आपात बैठक
मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने राज्य के नारायणपुर जिले में धौड़ाई के पास नक्सलियों द्वारा घात लगाकर किए गए हमले की तीव्र निंदा की है। डॉ. सिंह ने इस वारदात के दौरान नक्सलियों का मुकाबला करते हुए सुरक्षा बलों के अनेक जवानों की शहादत पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है और शहीद जवानों के शोक संतप्त परिवारजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की है। मुख्यमंत्री ने घायल जवानों के जल्द स्वास्थ्य लाभ की कामना की है और अधिकारियों से कहा है कि उनका बेहतर से बेहतर इलाज सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा है कि नक्सलियों में इतना नैतिक साहस नहीं है कि वे हमारे बहादुर जवानों से आमने-सामने मुकाबला कर सके, इसलिए उन्होंने कायरता का परिचय देते हुए छुपकर वार किया है और हमारे वीर जवानों की हत्या की है। मानव अधिकारों में आस्था रखने वाले सभी शांतिप्रिय नागरिकों और संगठनों को हर प्रकार के वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर नक्सलियों की इस शर्मनाक हरकत की एक स्वर से निंदा करनी चाहिए। डॉ. रमन सिंह ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने आम जनता और सुरक्षा बलों के जांबाज जवानों के सहयोग से बस्तर संभाग सहित राज्य के अन्य नक्सल पीड़ित जिलों को भी नक्सल हिंसा और आतंक से मुक्त करने का संकल्प लिया है। हमारे जवानों का मनोबल बहुत ऊंचा है और वे पूरी दृढ़ता के साथ नक्सलियों का मुकाबला कर रहे हैं। डॉ. सिंह ने कहा कि आज की इस घटना में सुरक्षा बलों के जवानों ने बस्तर संभाग और नारायणपुर जिले की जनता को नक्सल आतंक से मुक्त करने के अभियान में अपने प्राणों की आहुति दी है। उनकी यह शहादत व्यर्थ नहीं जाएगी।
आपात बैठक
डॉ. रमन सिंह ने इस वारदात की जानकारी मिलते ही आज रात यहां अपने आवासीय कार्यालय में प्रदेश सरकार के गृह मंत्री ननकी राम कंवर, मुख्य सचिव  पी. जॉय उम्मेन, गृह विभाग के प्रमुख सचिव  एन.के. असवाल और पुलिस महानिदेशक विश्वरंजन सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की आपात बैठक लेकर स्थिति की पूरी जानकारी ली और उन्हें जरूरी दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने इस घटना के बारे में केन्द्रीय गृह मंत्री  पी. चिदम्बरम् से भी टेलीफोन पर विचार-विमर्श किया। श्री चिदम्बरम् ने भी घटना की तीव्र निदां की और जवानों की शहादत पर गहरा दु:ख प्रकट किया। चिदम्बरम् ने मुख्यमंत्री को छत्तीसगढ़ में नक्सल हिंसा से निपटने के लिए केन्द्र की ओर से निरन्तर सहयोग जारी रखने का भरोसा दिलाया।        
वैसे तो यह खबर आज सभी अखबारों में प्रकाशित हो जायेगी , पर शायद इस अन्दाज में न हो पाए । मजबूर हैं हमारे साथी भी । यहां यह खबर हम अपने ब्लॉगर साथियों के लिए लिख रहें हैं वो भी रात को करीब जब सवा बज चुके हैं । निःसंदेह यह घटना निदंनीय है । कायराना है । लेकिन उनके बारे में क्या कहेंगे जिन्हें  सम्हालने का जिम्मा मिला है और जो राजधानी की राजनीति से उबरना नहीं चाहते , पी एच क्यू से बाहर झांकना नहीं चाहते ? कौन कसेगा इन अधिकारियों पर सिकंजा ? ये जंगलों में जा कर क्यों काम नहीं करेंगे ? कब तक चलेगा ऐसा ही ?
अहम सवाल यह है कि आखिर और कब तक मारे जायेंगे जवान ?  कब तक यूं ही जाती रहेगी हमारे जवानों की जानें ?  और क्या देखना -  दिखाना चाहती है ,केन्द्र और राज्य की सरकारें ?  

अब तक की प्रमुख घटनायें _

  • 08 मई 2010 को बारुदी सुरंग विस्फ़ोट , बीजापुर कोडेपाल में  में 08 जवान शहीद
  • 06 अप्रैल 2010 को बारुदी सुरंग विस्फ़ोट और मुठ्भेड, ताड़मेटला में 76 जवान शहीद
  • 12 जुलाई 2009 को मदनवाड़ा राजनांदगांव में सीधा हमला कर पुलिस अधीक्षक (एस  पी) वी के  चौबे समेत 29 पुलिस कर्मी शहीद हुए ।
  • 20 जून 2009 को कोकावाड़ा तोंगपाल में बारूदी सुरंग विस्फ़ोट ,   09 जवान शहीद
  • जवाबों मई को रिसगांव धमतरी में हमला किया ,13 जवान शहीद अनेक घायल
  • 10 अप्रैल  2009 को जगरगुण्ड़ा चिन्तागुफ़ा में पुलिस से मुठभेड़ हुई 09 जवान शहीद हुए
  • 25 नवम्बर 2008 को मर्दापाल में बारुदी सुरंग विस्फ़ोट  06 जवान शहीद हुए
  • 20 अक्टूबर 2008 को बीजापुर कोंगुपल्ली में बारुदी सुरंग विस्फ़ोट ,12 जवान शहीद
  • 29 सितम्बर 2008 को मारीकोडेर में बारुदी सुरंग विस्फ़ोट में 04 जवान शहीद
  • 29 अगस्त 2008 को छेरीबेडा बेनूर में बारुदी सुरंग विस्फ़ोट  ,06 जवान शहीद
  • 18 मार्च 2008 को धरमावरम पामेड में मुठभेड़ हुई 17 नक्सली मारे गए थे
  • 18 फ़रवरी 2008 को तड्केल में  मुठभेड़ हुई 06 जवान शहीद हो गए थे
  • 09 जुलाई 2008 जगरगुण्डा उपलमेटा में मुठभेड़ हुई 24 जवान शहीद हो गए थे
  • 15 मार्च 2007 को रानी बोदली कुटरू में पुलिस के कैम्प पर हमला किया गया 55 जवान शहीद,18 घायल
  • 18 जुन 2006 को बन्डा कोंटा में बारुदी सुरंग विस्फ़ोट कर 04 जवानों को शहीद किया
  • इसी माह (जून 2006) में नक्सलियों ने  दंतेवाडा के एर्राबोर राहत शिविर में हमला कर 33 आदिवासियों की निर्मम हत्या की 
  • नक्सलियों द्गारा मारे गये एस  पी ओ , गला रेत कर मारे गये  बेकसूर ग्रामीण  जनों की संख्या हजारों में  बताई जाती है । 

3 टिप्‍पणियां:

  1. बेबाक रपट आशुतोष भईया, धन्‍यवाद. कल रात से टीवी में इस समाचार को देख रहे हैं. आपके प्रश्‍नों का उत्‍तर जनता भी चाहती है पर लगता है सरकार को इसकी जबादेही का भान ही नहीं है.

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  2. बस एक बार सरकार को फ़ैसला लेना चाहिए आर या पार,बस अब बहुत हो गया नाटक् केन्द्र और राज्य सरकार के बी्च।

    रोम जल रहा था नीरो बांसुरी बजा रहा था।
    अच्छी रिपोर्ट

    उत्तर देंहटाएं
  3. बस इतना याद रखना वो हमारी लड़ाई लड़ रहे थे ............... ये शब्द थे किसी कवि के जो मैंने कल एक रेडियो पर सुने कल इस लम्बी कविता में आपकी पूरी चिंताए और दुःख आ गया था ,ये कमरों में बेठ कर लड़ते है वो शहीद मैदाने जंग में धोखे के शिकार होते है ,यहाँ तो पूरी तरह सुरक्चित हॉल में भी भाषण देते समय बुलेट प्रूफ पर्दा ले कर जवान खुद को शहीद करने तैयार रहता है अब देर नहीं करना चाहिए और आदिवासियों और नक्सलियों की चिंता करने वाले हितेषियो को लेकर मैदान में जाना चाहिए ताकि सब कुछ उनके आखो के सामने घटे ..........................

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आपकी मूल्यवान टिप्पणी के लिए कोटिशः धन्यवाद ।

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