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रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस

रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा   :  मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस
रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एस.एम.एस. -- -- -- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ट्रेन में आने वाली दिक्कतों संबंधी यात्रियों की शिकायत के लिए रेलवे ने एसएमएस शिकायत सुविधा शुरू की थी। इसके जरिए कोई भी यात्री इस मोबाइल नंबर 9717630982 पर एसएमएस भेजकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। नंबर के साथ लगे सर्वर से शिकायत कंट्रोल के जरिए संबंधित डिवीजन के अधिकारी के पास पहुंच जाती है। जिस कारण चंद ही मिनटों पर शिकायत पर कार्रवाई भी शुरू हो जाती है।

जुलाई 21, 2010

डॉक्टर के नेतृत्व में ऑपरेशन शिवनाथ की शुरूआत

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने हेलीकाप्टर से शिवनाथ नदी का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने राजधानी रायपुर से रवाना होकर सर्वेक्षण के प्रथम चरण की शुरूआत राजनांदगांव जिले में मोंगरा जलाशय से की और रायपुर जिले के सिमगा से आगे नांदघाट तक नदी के हालात का जायजा लिया। डॉ. सिंह ने मोंगरा ने नांदघाट तक, दो घंटे तक पांच सौ फीट से भी नीचे उड़ान भरते हुए नदी की लगभग ढाई सौ किलोमीटर की सर्पाकार पट्टी का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि शिवनाथ नदी के संरक्षण के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करना उनके आज के इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य है। मुख्यमंत्री के साथ हवाई सर्वेक्षण में प्रमुख सचिव आवास एवं पर्यावरण एन.बैजेन्द्र कुमार, जल संसाधन विभाग के सचिव सी.के.खेतान और ऊर्जा विभाग के सचिव अमन कुमार सिंह भी थे। शिवनाथ नदी छत्तीसगढ़ की प्रमुख जीवन रेखा महानदी की सहायक है। राजनांदगांव जिले के अम्बागढ़ चौकी विकासखंड के ग्राम कोड़गुल से निकलकर शिवनाथ रायपुर जिले में धरसींवा के पास सोमनाथ में खारून नदी से मिलती है और वहां से सिमगा, नांदघाट होते हुए बिलासपुर तथा जांजगीर-चाम्पा जिले का सफरकरते हुए शिवरीनारायण में महानदी और जोंक नदी के साथ संगम में समाहित हो जाती है। शिवनाथ की कुल लम्बाई लगभग 364 किलोमीटर है। डॉ. रमन सिंह ने कहा कि वे सर्वेक्षण के दूसरे चरण में निकट भविष्य में नांदघाट से आगे शिवरीनारायण तक हेलीकॉप्टर से इस नदी का अवलोकन करेंगे, जहां महानदी और जोंक नदी के साथ शिवनाथ का त्रिवेणी संगम बनता है। डॉ. सिंह ने कहा कि शिवनाथ न केवल राजनांदगांव जिले की बल्कि छत्तीसगढ़ के एक बहुत बड़े अंचल की भी प्राकृतिक जीवन रेखा है। इसमें जहां कहीं भी गहरीकरण और साफ-सफाई की जरूरत होगी, वह सबके सहयोग से किया जाएगा। इसके अलावा नदी के दोनों किनारों पर कटाव रोकने के लिए वृक्षारोपण करते हुए बाढ़ नियंत्रण की योजना भी क्रियान्वित की जाएगी। नदी में जहां कहीं भी लघु सिंचाई योजना के रूप में स्टाप डेम, एनीकट आदि की जरूरत होगी, उनके निर्माण के लिए भी प्रस्ताव तैयार किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शिवनाथ के साथ-साथ प्रदेश में अन्य नदी-नालों के संरक्षण के लिए भी राज्य शासन द्वारा कदम उठाए जा रहे हैं। बिलासपुर जिले में अरपा नदी के लिए विशेष प्राधिकरण गठित किया जा चुका है। बहुत जल्द इस प्राधिकरण के जरिए अरपा के संरक्षण और विकास के लिए भी कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल किया जाएगा। कबीरधाम जिले में सकरी नदी को बचाने के लिए भी कार्य योजना तैयार की जा रही है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद यह पहला अवसर है, जब इस नये प्रदेश में नदी-नालों और तालाबों को बचाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में सामूहिक श्रमदान और जनसहयोग से एक विशेष अभियान इस वर्ष गर्मियों में शुरू किया गया है।

1 टिप्पणी:

  1. रमन का यह कार्य नमन योग्‍य है, बरसों पहले इस नदी में केडिया डिस्‍टलरी द्वारा प्रदूषण फैलाया जा रहा था तब बेमेतरा के तत्‍कालीन विधायक स्‍व. श्री महेश तिवारी जी नें शिवनाथ यात्रा निकाली थी। उस समय डिस्‍टलरी का प्रदूषण इतना था कि कुम्‍हारी से लेकर सिमगा के नीचे तक का पानी लाल हो गया था।
    मेरा आधा जीवन, इस पावन नदी के तट में बसे एक गांव जो सोमनाथ संगम के निकट ही है, में गुजरा है इस कारण मेरी आस्‍था शिवनाथ में है।

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आपकी मूल्यवान टिप्पणी के लिए कोटिशः धन्यवाद ।

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