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रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस

रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा   :  मो. नं. 9717630982 पर करें एसएमएस
रेलवे की एस.एम.एस. शिकायत सुविधा : मो. नं. 9717630982 पर करें एस.एम.एस. -- -- -- ---------------------------------------------------------------------------------------------------------------- ट्रेन में आने वाली दिक्कतों संबंधी यात्रियों की शिकायत के लिए रेलवे ने एसएमएस शिकायत सुविधा शुरू की थी। इसके जरिए कोई भी यात्री इस मोबाइल नंबर 9717630982 पर एसएमएस भेजकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। नंबर के साथ लगे सर्वर से शिकायत कंट्रोल के जरिए संबंधित डिवीजन के अधिकारी के पास पहुंच जाती है। जिस कारण चंद ही मिनटों पर शिकायत पर कार्रवाई भी शुरू हो जाती है।

नवंबर 20, 2010

बढ़ रहा है भ्रष्टाचार और लालच , आप क्या सोचते हैं ???


कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा है कि देश में भ्रष्टाचार और लालच बढ़ रहा है। इससे उन मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है जिनके आधार पर आजाद भारत का उदय हुआ था।उन्होंने कहा कि भारत को अब ज्यादा कुशल सरकार की जरूरत है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 93वें जन्म दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में सोनिया गांधी ने कहा, देश की अर्थव्यवस्था भले ही बढ़ रही हो, लेकिन हमारे नैतिक मूल्य गिर रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि केवल बेहतर विकास अपने आपमें हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए, उससे ज्यादा जरूरी है कि हम कैसा समाज बनाना चाहते हैं और कैसे मूल्य उसमें डालना चाहते हैं। हाल ही 2जी स्पेक्ट्रम समेत सामने आए घोटालों के मद्देजनर सोनिया का यह बयान काफी अहम है। उनकी यह चिंता सरकार की भावी रणनीति की ओर संकेत करती है।
बहुत ही शर्म की बात है यह उन भारतीय नेताओं के लिए जो स्वयं को इस देश का हिमायती - देश भक्त कहते हैं । राजनीतिक पार्टी चाहे जो भी हो , राज्य कोई भी हो "भ्रष्टाचार और लालच" ने किसी को भी नहीं छोड़ा है । सच्चाई यही है, कोई स्वीकार करे न करे । इस बात पर गैर राजनीतिज्ञों -आमलोगों , सचमुच में बुद्धिजीवियों , देश भक्तों को चिंतन करना चाहिए । सामने आ कर ऐसे ढ़ोंगी नेताओं को उखाड़ बाहर फ़ेंकने की शुरुवात करनी चाहिए । समय जरूर लग सकता है पर नामुमकिन नहीं है ऐसा होना । किसी राष्ट्रीय पार्टी, वो भी कॉग्रेस जैसी पार्टी के अध्यक्ष का यह कहना कि - " देश में भ्रष्टाचार और लालच बढ़ रहा है। इससे उन मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है जिनके आधार पर आजाद भारत का उदय हुआ था। " बहुत  बड़ी बात है । आजादी के बाद स्वतंत्र हो कर हम शायद स्वछंद हो गये और अंग्रेजों से भी बदतर व्यवहार अपने ही देशवासियों के साथ किया । विकास का नाम लेकर लूटा अपनों को ही। क्या यही था आजाद भारत का सपना ?
आज एक अरसा हो गया एक सभ्य - अच्छा आदमी डरता है राजनीति में आगे आने से , क्यों ? आज बिना रिश्वत राशन कार्ड़ तक नहीं बन पा रहा है , यहाँ तक कि वार्ड़ मेम्बर बन जाने के बाद नेता की ईकाई बना व्यक्ति भी सीधे मुँह बात नहीं करता अपने ही मोहल्ले के अपने लोगों से ,क्यों ? स्कूल में हो या फ़िर अस्पताल दोनों ही जगह एडमिशन बिना रिश्वत नहीं हो पाता ,क्यों ?  पुलिस हो या फ़िर पत्रकार , सरकारी हो गैरसरकारी  कोई भी इससे अछूता नहीं दिख पड़ता है ।ऐसी तमाम बातें हैं , तमाम उदाहरण हैं जो हमारा चरित्र बयां करते हैं ।क्या ऐसा ही आजाद - बरबाद भारत सोचा था हमारे-आपके पुर्वजों ने ?   भ्रष्टाचार और लालच पर बातें और भी बहुत सी की जा सकतीं हैं लेकिन ऐसा कुछ भी नया  नहीं जिसे आप न जानते हों , आम आदमी  जिससे त्रस्त न हो ।
क्या अब वह समय निकट नहीं आ गया है जब  अच्छे लोग , ईमानदार लोग , सकारात्मक सोच के लोग , ऊंचे मनोबल वाले लोग राजनीति में पूरे मनोयोग से आयें  या अच्छे लोगों का समर्थन करें ,उनका मनोबल बढ़ाएं , देश के लिए - अपनी भावी पीढ़ी के लिए एक अच्छा वातावरण बनाने का प्रयास करें , लालची-भ्रष्ट लोगों को सींखचों के पीछे , जहां उनकी जगह होनी चाहिए वहीं भेजें । सम्मान जनक वातावरण में अपने देशवासियों को सिर उठा कर जीने का , निर्भय हो कर जीने का अवसर नहीं दिया जाना चाहिए ? क्या "नेता जी" शब्द को बदनाम करने वालों को सजा नहीं मिलनी चाहिए ? जिस सोनिया गांधी को विपक्ष विदेशी कहते नहीं थकता ,उसी सोनिया गांधी ने देश में त्याग और बलिदान की मिशाल पेश की और आज फ़िर उसी ने यह कहने का साहस भी किया है कि देश की अर्थव्यवस्था भले ही बढ़ रही हो, लेकिन हमारे नैतिक मूल्य गिर रहे हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि केवल बेहतर विकास अपने आपमें हमारा लक्ष्य नहीं होना चाहिए, उससे ज्यादा जरूरी है कि हम कैसा समाज बनाना चाहते हैं और कैसे मूल्य उसमें डालना चाहते हैं। कहाँ हैं और क्युँ दुबके बैठे हैं वे लोग जिनके पास मानो नैतिकता की ठेकेदारी है , देश भक्ति का टेंडर है । आईये उनकी सरकारों का भी हाल देखिए कि कैसे भ्रष्टाचार और लालच में आकण्ड डूबे हुए हैं उसके तमाम जिम्मेदार लोग ! सोनिया गांधी के कथन को  किसी दलगत राजनीति से ऊपर उठ कर सोचना-समझना चाहिए । सही समय आ गया है ,और इंतजार किस बात का करना होगा ? जरूरत है साहसिक कदम बढ़ाने की -कुछ कर दिखाने की ।

9 टिप्‍पणियां:

  1. Sonia Gandhi has once again proved that she preaches what she thinks. We the citizens are equally responsible for these problems. We only pay lipservice and abuse the politicians & bureaucrates but we don't have the time and interest to involve ourselves, directly or indirectly so as to change the system.

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  2. इस बात से हमे ये सिखना चाहिये कि एक महीला बाहर से आकर हमारी सन्स्क्रिति और सन्स्कार का पालन कर रहि है और हम है कि अपने सिद्धान्त और मुल्यो को भुल गये है।

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  3. कार्तिक पूर्णिमा एवं प्रकाश उत्सव की आपको बहुत बहुत बधाई !

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  4. वास्तव में भ्रष्टाचार आज भारत के लिए घुन सा बन बया है। विदेशी दासतां के समय में हमारे राष्ट्रनायकों ने ऐसे भारत का सपना नहीं देखा थ। आज भ्रष्टाचार नाम की बीमारी को मिटाने के लिए देश की जनता को जाग्रत होने की आवश्यकता है। जनता अगर संकल्प कर ले तो यह काम कोई कठिन नहीं है। आशुतोषजी ने बहुत सुन्दर पोस्ट लिखी है अगर इसमें भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए पहल करने वाले कुछ व्यक्तित्वों का हवाला और दिया जाता तो यह सोने पर सुहागा होता।

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  5. श्री सोनी जी सर्वप्रथम तो आपका आभार , आगमन एवम टिप्पणी के लिए । सविनय कहना चाहुँगा भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए किसी और को नहीं, हमको-आपको ही सामने आना होगा , यह हम सबकी समस्या है। राजनीति की दशा-दिशा ठीक हो सके इस हेतु भी कदम उठाना होगा ।

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  6. अवतार मेहेर बाबा का कथन है: Desire for Desirelessness,
    मेरी समझ में यह सबसे सुन्दर रास्ता है...
    सस्नेह
    चन्दर मेहेर
    इंग्लिश की क्लास

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  7. मिश्रा जी आपके ब्लाग का प्रथम अध्याय तफ़सील से पढा ,( भ्रष्टाचार,ज़मीं से जुड़े अधिकारी, ईद मुबारक , दीवाली, शर का विकास और सभी) शैली , भाषा, अन्दाज़े-बयां बहुत ही अच्छा लगा। व्यवस्था के ख़िलाफ़ सच को उजागर करने वाली तल्ख़ टिप्पणीयां लिखने का काम आज के ज़माने मेंएक साहसी व्यक्ति या फ़िर कोई दरवेश ही कर सकता है, बहुत बहुत बधाई।

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  8. श्री आशुतोषजी, नमस्कार...
    अभी-अभी पेपर वाचन समाप्त करके उठा हूँ और तीन आर्थिक महाघोटालों का राष्ट्रीय चिंतन बांचकर आ रहा हूँ । भ्रष्टाचार, घोटाले और निरन्तर बढ रहा लालच फिलहाल तो ऐसा ही दिख रहा है कि मर्ज बढता गया ज्यों-ज्यों दवा की. शेष पुनः

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  9. ye bhashanbaaji to Gandhi pariwar 50 years ke kar raha hai bhai sahab... majaa to tab aayega jab pataa chale ki inhone bhrashtachar ke alaawaa desh ke liye aur kiya kya hai ?

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आपकी मूल्यवान टिप्पणी के लिए कोटिशः धन्यवाद ।

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